यह काल्पनिक दृश्य मानिए। गुरुग्राम में रात 10:17 बजे, रोहन अपने छोटे से डेस्क पर बैठा था। चाय ठंडी हो चुकी थी और स्क्रीन पर एक विज्ञापन खुला था: नई इश्यूअन्स पिछले साल की रफ्तार से 50% आगे चल रही है, जबकि क्रेडिट स्प्रेड ऐतिहासिक रूप से तंग हैं। उसने “50%” देखकर बॉन्ड से जुड़ी अपनी पोजीशन बढ़ाने का ऑर्डर तैयार कर लिया। बाजार बंद होने से पहले निर्णय लेना था। गलत समझा गया एक प्रतिशत उसे ऐसी दिशा में धकेल सकता था जिसका उसकी मूल ट्रेडिंग योजना में कोई स्थान नहीं था।
फिर उसने ऑर्डर रोक दिया। कारण कोई नया संकेत नहीं था। उसने केवल पाँच खाली खाने बनाए और पाया कि विज्ञापन की पंक्ति उनमें से कई को भरती ही नहीं थी।
पहले रुपये या डॉलर में कुल आपूर्ति खोजिए
प्रतिशत से पहले प्रश्न होना चाहिए: जारी कितनी राशि हुई?
मान लीजिए किसी अवधि में इश्यूअन्स 100 से बढ़कर 150 इकाई हो गई। वृद्धि 50% है और अतिरिक्त आपूर्ति 50 इकाई। यदि वही प्रतिशत 10,000 से 15,000 इकाई पर लागू हो, तो बाजार पर पड़ने वाली संभावित आपूर्ति का आकार बिल्कुल अलग होगा। प्रतिशत समान है, वास्तविक मात्रा नहीं।
मुद्रा भी स्पष्ट होनी चाहिए। क्या आंकड़ा स्थानीय मुद्रा में है, अमेरिकी डॉलर में बदला गया है, या कई मुद्राओं को जोड़कर दिखाया गया है? विनिमय दर में बदलाव होने पर डॉलर में मापी गई वृद्धि और स्थानीय मुद्रा में मापी गई वृद्धि अलग दिख सकती है।
“नई इश्यूअन्स” में क्या शामिल है, यह भी देखें। क्या आंकड़ा केवल सार्वजनिक पेशकशों का है? निजी प्लेसमेंट भी जुड़े हैं? पुनर्वित्त के लिए जारी ऋण और नई पूंजी जुटाने वाली इश्यूअन्स को एक साथ रखा गया है? जब परिभाषा गायब हो, तब 50% एक सटीक दिखने वाला अधूरा आंकड़ा है।
प्रतिशत और समय-अवधि की गणना खोलिए
“पिछले साल की रफ्तार से 50% आगे” कई अर्थ दे सकता है। इस साल की आज तक की कुल इश्यूअन्स की तुलना पिछले साल की समान तारीख तक की कुल राशि से की गई हो सकती है। किसी एक महीने की तुलना पिछले साल के उसी महीने से हो सकती है। वार्षिक अनुमान की तुलना पिछले पूरे वर्ष से भी हो सकती है।
इन तुलनाओं को आपस में बदलना ठीक नहीं।
आधार छोटा हो तो प्रतिशत तेजी से बड़ा दिखता है। यदि पिछले साल किसी असामान्य कारण से गतिविधि दब गई थी, तो उसके मुकाबले सामान्य स्तर पर वापसी भी 50% वृद्धि बन सकती है। इसे बेस इफेक्ट कहते हैं। इस स्थिति में संख्या बाजार में अचानक आए बदलाव से अधिक, पिछले आधार की कमजोरी बता रही होती है।
समय-अवधि के भीतर सौदों का वितरण भी मायने रखता है। क्या इश्यूअन्स पूरे दौर में समान रही, या कुछ बड़े सौदों ने कुल आंकड़ा ऊपर खींच दिया? एक ही तारीख तक की तुलना कैलेंडर, छुट्टियों या सौदों के आगे-पीछे होने से प्रभावित हो सकती है।
रोहन ने यहीं अपना पहला निष्कर्ष काट दिया। उसे बढ़ती इश्यूअन्स दिख रही थी, लेकिन यह साबित नहीं हुआ था कि वृद्धि लगातार, व्यापक या असामान्य थी।
जारीकर्ता और तुलना-समूह अलग कीजिए
अगला सवाल है: जारी कौन कर रहा है?
सरकार, बैंक, गैर-वित्तीय कंपनियां और अलग-अलग देशों के जारीकर्ता एक ही जोखिम नहीं रखते। निवेश-ग्रेड और अधिक जोखिम वाले ऋण को जोड़ने से वह अंतर छिप सकता है जिसे व्यापारी को देखना चाहिए। “मेपल बॉन्ड” जैसे वर्ग का उल्लेख हो, तो उसकी परिभाषा, मुद्रा और कुल आंकड़े में उसका हिस्सा जांचना जरूरी है।
“इस वर्ग ने बढ़त का नेतृत्व किया” का अर्थ भी स्पष्ट होना चाहिए। क्या उसने सबसे बड़ी कुल राशि जारी की, सबसे ज्यादा प्रतिशत वृद्धि दर्ज की, या कुल वृद्धि में सबसे अधिक अतिरिक्त आपूर्ति जोड़ी? तीनों बातें अलग हैं।
तुलना-आधार भी समान होना चाहिए। एक क्षेत्र की इस साल की आंशिक अवधि की तुलना दूसरे क्षेत्र के पूरे वर्ष से करना उपयोगी तुलना नहीं है। इसी तरह, सकल इश्यूअन्स और परिपक्व हो रहे ऋण को घटाने के बाद बची शुद्ध इश्यूअन्स अलग संकेत देती हैं। भारी सकल आपूर्ति के बावजूद शुद्ध नई आपूर्ति सीमित हो सकती है।
बाजार संकेत बनाने से पहले निर्णय रोकिए
तंग क्रेडिट स्प्रेड और तेज इश्यूअन्स साथ दिखाई दें, तो कई व्याख्याएं संभव हैं। जारीकर्ता उपलब्ध मांग का लाभ उठा रहे हों। निवेशक कम अतिरिक्त प्रतिफल पर भी ऋण खरीद रहे हों। कुछ बड़े सौदों ने तस्वीर बदल दी हो। या पिछले साल का आधार असामान्य रूप से कम रहा हो।
इनमें से किसी एक व्याख्या को आंकड़े से स्वतः सिद्ध नहीं मानना चाहिए। स्प्रेड किस सूचकांक के हैं, किस अवधि के हैं और “ऐतिहासिक रूप से तंग” किस इतिहास के मुकाबले कहा गया है, यह भी जानना होगा।
यहीं ट्रेडिंग अनुशासन काम आता है। किसी दावे को तुरंत ऑर्डर में बदलने से पहले उसे अनुमोदन योग्य निर्णय में बदलिए। थीसिस लिखिए, जरूरी आंकड़ों की सूची बनाइए, गलत साबित होने की शर्त तय कीजिए, पोजीशन का आकार सीमित कीजिए और अधिकतम स्वीकार्य नुकसान पहले दर्ज कीजिए। यही वजह है कि [अपनी निर्णय प्रक्रिया की जांच](\/blog\/hi\/क्या-तीसरा-बॉट-बदलने-से-पहले-आपको-अपनी-निर्णय-प्रक्रिया-जाँचनी-चाहिए-6eb70fae\/) किसी नए संकेत या नए बॉट से अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
उस रात रोहन ने तैयार ऑर्डर मंजूर नहीं किया। अगली सुबह उसकी स्क्रीन पर “50%” के नीचे पाँच पंक्तियां थीं: कुल राशि, गणना, अवधि, जारीकर्ता, आधार। संख्या वही थी। उसका निर्णय बदल चुका था, क्योंकि अब वह शीर्षक पर प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था।
शैक्षिक सामग्री, वित्तीय सलाह नहीं।
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